Tuesday, July 23, 2024
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Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

Matlabi Rishte Dhoka Shayari

धोखा खाया है तूने, बेवफा ये ज़हर तेरी आँखों में था,

प्यार का जो आलम था, वो दर्द का इल्तिज़ार तेरे लबों में था।

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तेरे इश्क़ ने दिया ज़हर का जाम,

जिसका मतलब था सिर्फ़ धोखा और ग़म।

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छोड़ गया तूने हमें अकेला,

दिल टूटा, ख्वाब सजाने का मन हुआ नफ़रत का।

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तेरी चाहत में बहुत कुछ खो बैठे हैं हम,

पर तू ने दिया बस धोखा, कुछ भी नहीं मिला हमें।

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तेरी आँखों में छुपा है जो धोखा,

वहीं तो हमारी खुशियों का खामियाज़ा।

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Matlabi Rishte Dhoka Shayari

प्यार में धोखा नहीं, इश्क़ में लुटा दिया तूने,

वफ़ा का वादा करके, हमें तोड़ा तूने।

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तेरी मोहब्बत ने किया बेवफाई का सिला,

अब तो दिल को भी तुझसे मोहब्बत है खफ़ा।

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तेरी यादों का खेल खेलते हैं हम,

मगर तेरी यादें हैं सिर्फ़ धोखा ही हमें।

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वादा किया था तूने प्यार का साथ,

पर तेरी चालाकी ने किया सबको हँसाते हुए रूठा।

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दिल की बातें छुपा ली तूने, खेल खेल में,

अब तेरी यादों के साथ रहती है, ये दिल अकेले।

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Rishte Matlabi Shayari

Rishte Matlabi Shayari

रिश्तों की मतलबियत ने खोखला किया है दिल,

जब से तू आया, प्यार की जगह बस मतलब रहा है।

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धोखा खाकर तूने बेवफाई का दस्तूर बना लिया,

रिश्ते अब सिर्फ़ मतलब की दुकान बना लिया।

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प्यार के नाम पर तूने किया सिर्फ़ मतलब,

दिल को छूने की जगह, सिर्फ धोखा और दर्द है साथ।

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रिश्तों में सच्चाई का अब कोई मतलब नहीं,

सब कुछ बेचा है धन के लालच में, इस दिल का कोई अहमियत नहीं।

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तेरे लिए मेरा प्यार सिर्फ़ एक मतलब है,

तूने तो मेरे जीने का अर्थ ही मिटा दिया है।

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Rishte Matlabi Shayari

रिश्तों का मतलब है सिर्फ़ फायदा और हानि,

प्यार की बातें करने से पहले, सोच ले एक बार फिर से तू मनमानी।

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तेरे मतलबी प्यार ने तोड़ दिया है मेरा विश्वास,

अब रिश्तों के बारे में दिल में है बस खाली जगह।

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इश्क़ ने बना दिया हमें रिश्तों की कौफ़ी,

जब से तू आया, सिर्फ़ फायदा और मतलब ही रहा खोखला।

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तेरी मतलबी मोहब्बत ने किया है धोखा,

अब तो दिल में बसी है तेरे खोखले रिश्तों की सौगात।

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रिश्तों का मतलब सिर्फ़ देना और लेना है,

प्यार की बातें करने की जगह, सिर्फ़ मतलबी बातें ही रही हैं।

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Matlabi Paise Ki Duniya Hai Shayari

Matlabi Paise Ki Duniya Hai Shayari

पैसों की दुनिया में जितना दिल नहीं,

उतना तो मतलब होता है हर किसी के लिए।

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प्यार और पैसे का जंगल, जहाँ रहता है मतलब,

दिलों का सौदा हो गया है खरीद-बेच के बाज़ार में।

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रूपयों की चाहत में कई रिश्ते तोड़े,

प्यार के नाम पर, सिर्फ़ मतलब की खोज में भटके।

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पैसे की दौलत से तो खरीदी जा सकती है हर वस्तु,

पर प्यार की क़ीमत ना जाने कितने रिश्ते हो गए टूट।

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धन की पीठ पर सभी के बैठी है मोहब्बत,

पर जब चाहत से ज्यादा हो गया मतलब, फिर क्या कहें हम इस बात।

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जितनी बढ़ गई है पैसों की लालची दुनिया,

उतना ही टूट गए हैं रिश्तों के पुराने सपना।

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पैसों की दौलत में खो गए हम,

प्यार के जंगल में छोड़ दिया हमें तूने तन्हा।

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धन की भागमभाग में खोया है सब कुछ,

रिश्तों की मूल्य को भूल गए हैं सब लोग।

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चाहत ने हार दिया, धन के सामने,

प्यार की अमानत, अब सबकी आंखों में दिखाई नहीं देती।

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दिलों की जगह बजार में पैसों की कीमत होती है,

प्यार की दौलत अब सबके दिल से ग़ायब होती है।

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Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

रिश्तों की मतलबियत ने दिया धोखा,

प्यार की बातों में छुपा था जीने का सपना।

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धोखा खाकर तूने तोड़ा दिल,

रिश्तों की मतलबियत में छिपी थी सच्चाई।

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प्यार के नाम पर किया तूने धोखा,

रिश्तों में वफ़ा की जगह था सिर्फ़ मतलब का बोझ।

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तेरी दुनिया में प्यार का कोई स्थान नहीं,

सिर्फ़ धोखेबाज़ी की छाया है हर किसी के मन में।

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धोखा दिया तूने इस प्यार के नाम पर,

रिश्तों में वफ़ा की जगह बना लिया मतलब का खेल तूने।

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Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

रिश्तों की धोखेबाज़ी में खोया है दिल,

प्यार की बातों में बस था खोखला मतलब ही।

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प्यार की बातों में छुपा था जीने का सबकुछ,

पर तेरी धोखेबाज़ी ने तोड़ दिया हर सपना।

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रिश्तों की धोखेबाज़ी में है जिंदगी की तकदीर,

प्यार के बाज़ार में बिक गई हर किसी की खुशियाँ।

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तेरी धोखेबाज़ी ने छीन ली है सब कुछ,

रिश्तों की बुनियाद ही थी मतलब की खोज में।

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दिल को छू ली तेरी धोखेबाज़ी ने,

रिश्तों का आज़माना बस बन गया एक खेल धोखेबाज़ों का।

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Matlabi Dost Shayari

Matlabi Dost Shayari

दोस्ती का मतलब था साथ निभाना,

पर तेरी धोखेबाज़ी ने सारा रिश्ता मिटा दिया।

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दोस्ती का वादा किया था निभाने का,

पर तेरी मतलबी नेता बनकर सारा विश्वास तोड़ दिया।

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जितनी बढ़ गई तेरी धोखेबाज़ी,

उतनी ही गई दोस्ती की अहमियत।

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तेरी दोस्ती में छिपा था मतलब,

धोखेबाज़ ने तोड़ दिया सारा रिश्ता।

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दोस्ती के नाम पर किया तूने धोखा,

रिश्तों की नींवें ही थी मतलब के बोझ में गिरी।

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धोखेबाज़ दोस्त ने तोड़ दिया हर सपना,

उसने छिन ली दोस्ती की मधुर रिवायत।

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तेरी धोखेबाज़ी ने छीन ली हर खुशी,

दोस्ती के नाम पर किया तूने धोखा अधूरा।

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दोस्ती का वादा किया था अनबने का,

लेकिन तेरी धोखेबाज़ी ने बिखरा दिए सपने अधूरे।

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धोखेबाज़ दोस्त ने बेच दिया सब कुछ,

दोस्ती के नाम पर धोखा बज़ार में बिक गया।

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दोस्ती की मिसाल बनी धोखेबाज़ी की किताब,

उसने बना दिया धोखा, जब दोस्त था समझा वही राज।

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Matlabi Rishte Ghamand Shayari

Matlabi Rishte Ghamand Shayari

गर्व से भरा है तेरा दिल, गमंद में डूबा हुआ,

रिश्तों को खोखला किया है, गर्व ने हर सपना तोड़ा हुआ।

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अहंकार की दुनिया में बसा है तेरा रिश्ता,

दिलों को छूने की जगह, तूने गर्व में बसा लिया मतलब का विलंब।

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गर्व से भरा है तेरा दिल, सच्चाई से दूर,

प्यार की बातों में, तूने बस मतलब का बाज़ार खोला है पूरे दिल से दूर।

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अहंकार ने बना लिया है रिश्तों का अंत,

गर्व की बातों में छिपा है सच्चा प्यार का संत।

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गर्व से भरी हुई है तेरी आँखें,

रिश्तों की मूल्य को भूल गए हैं, तेरे मन में बसी हैं सिर्फ अपनी महिमा की खोज।

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अहंकार ने ले ली है तेरे रिश्तों की ज़िम्मेदारी,

रिश्तों में प्यार की जगह, तूने गर्व का बोझ लेना बना लिया अपनी पहचान की सजा।

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गर्व से भरा हुआ है तेरा दिल, बेदर्दी से भरा,

अपने अहंकार में, तूने सच्चे रिश्तों की खोज में बहुत कुछ हरा।

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अहंकार की दुनिया में खोया है तूने अपने रिश्ते,

प्यार की जगह, तूने अपना गर्व ही बना लिया अपने मन की सच्ची दुकान।

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गर्व से भरी हुई है तेरी आँखें, छुपा हुआ है दिल,

अपने अहंकार में, तूने रिश्तों की सच्चाई को किया है तन्हा।

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अहंकार की ज़ंजीरों में बंद है तेरा रिश्ता,

गर्व की जगह, तूने अपने अहंकार को बना लिया सच्चे प्यार की आवाज़।

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Matlabi Family Rishte Shayari

Matlabi Family Rishte Shayari

परिवार में धोखेबाजी की छाया,

रिश्तों में मतलब का बोझ, प्यार की कमी छाई है सभी के दिल में।

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परिवार में सिर्फ़ स्वार्थ का खेल,

दिलों की बजाय धन की क़ीमत रखा है सबने।

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प्यार की बातों में छिपा है दुखद असलीता,

परिवार में धोखेबाजी की खेलता है सच्चाई की जगह।

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सिर्फ़ बढ़ते गए हैं स्वार्थ के बाज़ार में,

प्यार की बातें अब बस रिश्तों की खोज में खो गई हैं।

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परिवार के नाम पर बेवफाई का दस्तूर,

रिश्तों में धोखेबाजी की बजाय वफ़ादारी का खिलाफ़ा है सब का।

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सिर्फ़ खुशियों की छाया बना है परिवार,

प्यार की बातों में छिपा है सिर्फ़ दिल का तन्हा अधिकार।

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रिश्तों में धोखेबाजी का दुखद खेल,

प्यार की बातों में छिपा है खोखलापन और स्वार्थ का बोझ।

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सिर्फ़ दिखावे की दुनिया है परिवार की,

प्यार की बातों में छिपा है धोखेबाजी और स्वार्थ का दिलदारी।

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परिवार में सिर्फ़ रिश्तों का तैयारी,

प्यार की बातें छूने की जगह, धन की क़ीमत का दिखावा है बढ़ता जा रहा।

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रिश्तों में धोखेबाजी की छाया,

प्यार की बातों में छिपी है सिर्फ़ स्वार्थ की महिमा और आभास।

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